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चुनाव आयोग ने व्यापार गोपनीयता का हवाला देकर मतदाता सूची सॉफ्टवेयर का विवरण रोका
भारतीय चुनाव आयोग ने बताया है कि मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया में उपयोग किए जाने वाले सॉफ्टवेयर के बारे में जानकारी बौद्धिक संपत्ति अधिकारों और व्यापार गोपनीयता के तहत प्रकट नहीं की जा सकती। आयोग के अनुसार, पंजीकरण अधिकारी ही रिकॉर्ड के आधार पर मतदाताओं को सूची में शामिल या बाहर करने का निर्णय लेते हैं।
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भारतीय चुनाव आयोग ने मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया में प्रयुक्त सॉफ्टवेयर की विस्तृत जानकारी देने से इनकार कर दिया है। आयोग का कहना है कि इस सॉफ्टवेयर से जुड़ी तकनीकी जानकारी व्यापार गोपनीयता और बौद्धिक संपत्ति अधिकारों के अंतर्गत संरक्षित है और इसका खुलासा नहीं किया जा सकता। चुनाव आयोग के प्रवक्ताओं के अनुसार, मतदाता सूची में किसी का नाम शामिल करना या हटाना पूरी तरह से पंजीकरण अधिकारियों के विवेक पर निर्भर करता है, जो सरकारी रिकॉर्ड और आवश्यक दस्तावेजों के आधार पर यह निर्णय लेते हैं। आयोग का तर्क है कि नई सॉफ्टवेयर प्रणाली विकसित नहीं की गई है, बल्कि मौजूदा प्रणाली का ही उपयोग जारी है। इस निर्णय को लेकर कई विशेषज्ञों और पारदर्शिता कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं, जिन्होंने तर्क दिया है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में स्वचालित प्रणाली की कार्यप्रणाली के बारे में जनता को अधिकतम जानकारी मिलनी चाहिए।