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चुनाव अधिकारियों पर दबाव: हस्ताक्षर रहित फॉर्म-7 स्वीकार करने के लिए बाध्य किए जा रहे बूथ लेवल अधिकारी
देश के विभिन्न हिस्सों में बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को आवेदकों के हस्ताक्षर के बिना फॉर्म-7 स्वीकार करने के लिए दबाव डाला जा रहा है। इस गैर-मानक प्रक्रिया से चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और वैधता को लेकर चिंताएं उठ रही हैं।
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चुनाव आयोग की स्थापित प्रक्रियाओं में गड़बड़ी का आरोप लगते हुए बूथ लेवल अधिकारियों ने रिपोर्ट किया है कि उन्हें अनियमित तरीके से फॉर्म-7 दाखिल करने के लिए कहा जा रहा है। फॉर्म-7 मतदाता सूची से नामों को हटाने के लिए आवश्यक दस्तावेज है, जिसे आवेदकों के वैध हस्ताक्षर के साथ प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
यह प्रथा चुनावी पारदर्शिता के सिद्धांतों का उल्लंघन है। बीएलओ अपने कर्तव्य के प्रति सचेत हैं और उन्हें इस असामान्य दबाव का सामना करना पड़ रहा है। ऐसी प्रक्रियाओं से मतदाता सूची की अखंडता को नुकसान पहुंचने का खतरा है।
चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, सभी दस्तावेजों को समुचित सत्यापन के साथ और आवेदकों की अनुमति से ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए। इस मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए क्योंकि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बुनियाद को प्रभावित करता है।
इस संदर्भ में जिम्मेदार अधिकारियों से तत्काल स्पष्टीकरण की मांग की जा रही है ताकि मतदान प्रक्रिया के आचरण में पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके।