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चुनावी सत्यापन प्रणाली को लावासा ने 'संकल्पनात्मक रूप से त्रुटिपूर्ण' बताया
पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लावासा ने कहा है कि मतदाताओं पर प्रमाण का बोझ डालने वाली चुनावी सत्यापन प्रणाली (एसआईआर) में मौलिक खामियां हैं। लावासा के अनुसार यह प्रणाली लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ संरेखित नहीं है।
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भारत के पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लावासा ने चुनावी सत्यापन प्रणाली (एसआईआर) को लेकर गंभीर आपत्तियां उठाई हैं। लावासा के अनुसार यह व्यवस्था संकल्पनात्मक स्तर पर ही दोषपूर्ण है और मतदाताओं को अनावश्यक बोझ से दो-चार करती है। उनका मानना है कि इस प्रणाली की संरचना में ऐसे तत्व शामिल हैं जो जवाबदेही को गलत दिशा में ले जाते हैं। लावासा ने तर्क दिया है कि किसी भी निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया में सत्यापन की जिम्मेदारी मतदाताओं के बजाय चुनावी प्राधिकारों पर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में मतदाताओं को अपनी पसंद साबित करने का भार उठाना पड़ता है, जो लोकतांत्रिक सिद्धांतों के विरुद्ध है। पूर्व आयुक्त का यह विचार चुनावी सुधार और प्रणालीगत पारदर्शिता के व्यापक विमर्श में एक महत्वपूर्ण योगदान माना जा रहा है।