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इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं को स्थानीयकरण नियमों से जूझना पड़ रहा है
भारतीय ऑटोमोटिव निर्माता संगठन ने ट्रैक्शन मोटर और मोटर नियंत्रक प्रणालियों के स्थानीयकरण समय सीमा में सात महीने का विस्तार मांगा है। दुर्लभ-पृथ्वी चुंबक की आपूर्ति में व्यवधान इस अनुरोध का मुख्य कारण है।
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इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) निर्माता मंगलवार से लागू होने वाले स्थानीयकरण मानदंडों को लेकर गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। भारतीय ऑटोमोटिव निर्माता संगठन (एसआईएम) ने सरकार से ट्रैक्शन मोटर और मोटर नियंत्रक प्रणालियों की आवश्यक स्थानीय सामग्री सामग्री के लिए समय सीमा में सात महीने का विस्तार देने की अपील की है।
इस विस्तार की मांग अंतरराष्ट्रीय बाजार में दुर्लभ-पृथ्वी चुंबक की आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं के कारण की गई है। ये चुंबक इलेक्ट्रिक वाहनों की मोटरों के लिए एक महत्वपूर्ण घटक हैं और इनकी कमी से निर्माताओं को उत्पादन में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
नए स्थानीयकरण मानदंडों का उद्देश्य भारत में इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग को मजबूत करना है, लेकिन वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की समस्याओं के कारण निर्माताओं को इन अनिवार्य आवश्यकताओं को पूरा करने में कठिनाई हो रही है। एसआईएम का तर्क है कि अतिरिक्त समय मिलने से उद्योग आवश्यक घटकों की आपूर्ति व्यवस्था को स्थिर कर सकेगा।
आने वाले महीनों में यह देखा जाना बाकी है कि सरकार इस अनुरोध पर कैसी प्रतिक्रिया देती है और क्या वह निर्माताओं को कुछ राहत प्रदान करने के लिए नियमों में कोई परिवर्तन करती है।