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आईआईएम स्नातक ने IIT-IIM की होड़ को चुनौती दी, बच्चों को आनंद से जीना चाहते हैं
आईआईएम अहमदाबाद के एक प्रख्यात स्नातक ने भारत में प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा पर सवाल उठाया है। वह मानते हैं कि शीर्ष संस्थानों की अंधी दौड़ बचपन की खुशियों को छीन लेती है।
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भारत के शीर्ष प्रबंधन संस्थानों में से एक आईआईएम अहमदाबाद के एक सफल स्नातक ने देश की शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त प्रतिस्पर्धा की संस्कृति पर गंभीर टिप्पणी की है। उन्होंने कहा है कि IIT-IIM जैसे संस्थानों में प्रवेश की अंधी दौड़ ने बचपन की प्राकृतिक खुशियों को प्रभावित किया है।
इस स्नातक का मानना है कि शिक्षा केवल संस्थान के नाम तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकांश माता-पिता बचपन से ही अपने बच्चों को इस दौड़ में झेलने देते हैं, जिससे मानसिक तनाव और असंतुष्टि बढ़ती है। उनके अनुसार, बच्चों को सीखने के साथ ही खेल-कूद, रचनात्मकता और जीवन कौशल का विकास भी करना चाहिए।
वह अपने बच्चों के लिए एक अलग दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका विचार है कि प्रतिष्ठित संस्थान से आना जीवन की सफलता का एकमात्र पैमाना नहीं है। शिक्षा का उद्देश्य मनुष्य को सर्वांगीण विकास देना होना चाहिए, न कि किसी विशेष संस्थान का सदस्य बनाना।
इस वैचारिक मुद्दे ने माता-पिता, शिक्षकों और नीति-निर्माताओं के बीच एक महत्वपूर्ण बहस को जन्म दिया है कि क्या भारत की शिक्षा नीति युवाओं के समग्र विकास पर पर्याप्त ध्यान केंद्रित करती है या केवल प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं पर।