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महानगरों से परे उभरते शहरों में संपत्ति की कीमतों में तेजी
एक नए अध्ययन के अनुसार, भारत के उभरते बाजारों में पांच वर्षों में आवासीय संपत्तियों की कीमतों में 63 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि शीर्ष आठ महानगरों में यह वृद्धि केवल 42 प्रतिशत रही है।
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भारत की संपत्ति बाजार में एक महत्वपूर्ण बदलाव दिख रहा है। भारतीय उद्योग परिसंघ और नाइट फ्रैंक की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, देश के 11 उभरते शहरों में आवासीय मूल्यों में असाधारण वृद्धि देखी गई है। पिछले पांच वर्षों में इन शहरों में औसतन 63 प्रतिशत की कीमत वृद्धि हुई है।
इसके विपरीत, दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, पुणे, कोलकाता और अहमदाबाद जैसे प्रमुख आठ महानगरों में संपत्ति की कीमतें केवल 42 प्रतिशत बढ़ी हैं। यह तुलनात्मक आंकड़ा दर्शाता है कि निवेशकों और खरीदारों का ध्यान अब धीरे-धीरे प्रमुख महानगरों से हटकर छोटे और माध्यमिक शहरों की ओर स्थानांतरित हो रहा है।
इस प्रवृत्ति के पीछे कई कारण हैं। सुलभ कीमतें, बेहतर बुनियादी ढांचा विकास, रोजगार के नए अवसर और दूरस्थ कार्य की सुविधा इन उभरते शहरों को निवेश के लिए आकर्षक बना रहे हैं। स्थानीय आर्थिक विकास और सरकारी पहलें भी इन क्षेत्रों में संपत्ति की मांग बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रवृत्ति आने वाले वर्षों में जारी रहने की संभावना है। उभरते शहरों में संपत्ति निवेश की गुंजाइश अभी भी महानगरों की तुलना में अधिक दिख रही है। इस बाजार परिवर्तन को भारतीय अर्थव्यवस्था के विकेंद्रीकरण और क्षेत्रीय विकास की सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है।