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रोजगार गारंटी योजना संकट में, विस्तार का सपना धराशायी
सरकार की नई पहल रोजगार गारंटी को मजबूत करने का दावा करती रही है, लेकिन वास्तविकता में यह योजना कमजोर पड़ गई है। विशेषज्ञ चिंतित हैं कि मूल उद्देश्य से भटकाव का खतरा बढ़ गया है।
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केंद्र सरकार द्वारा लॉन्च की गई नई रोजगार गारंटी योजना को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के विस्तार के रूप में प्रस्तुत किया गया था। हालांकि, नीति निर्माताओं और विश्लेषकों के अनुसार, यह पहल अपने मूल उद्देश्य से भटक गई है और रोजगार गारंटी के ढांचे को नुकसान पहुंचा रही है।
योजना के क्रियान्वयन में आए अंतराल और प्रशासनिक चुनौतियों के कारण लाभार्थियों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया है। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन के लक्ष्य को प्राप्त करने में विफलता योजना की प्रभावशीलता पर सवाल उठाती है। कई राज्यों में कार्यान्वयन में ढिलाई देखी गई है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि बेहतर समन्वय और संसाधन आवंटन के बिना यह योजना अपने वास्तविक संभावना से कहीं कम परिणाम दे रही है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का तर्क है कि सरकार को मूल रोजगार गारंटी के ढांचे को मजबूत करने पर फोकस करना चाहिए।
आने वाले समय में यह देखना होगा कि क्या सरकार इस योजना में सुधार के लिए ठोस कदम उठाती है और रोजगार गारंटी को फिर से पटरी पर लाती है।