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ब्रिक्स 2026: ऊर्जा क्षेत्र सीमापार निवेश सरल बनाने की माँग
ऊर्जा उद्योग ब्रिक्स देशों के बीच सीमापार निवेश, तकनीकी साझेदारी और विकास बैंक के माध्यम से वित्तपोषण में आसानी चाहता है। महत्वपूर्ण खनिज, स्मार्ट ग्रिड और जैव ईंधन पर सहयोग बढ़ाने की भी अपेक्षा है।
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ब्रिक्स समूह के सदस्य देशों में ऊर्जा कंपनियाँ 2026 तक एक व्यापक ढाँचे की स्थापना के लिए अभियान चला रही हैं जो सीमापार निवेश को सरल बनाएगा। औद्योगिक हलकों में यह माना जा रहा है कि वर्तमान नियामक बाधाएँ क्षेत्रीय ऊर्जा सहयोग की गति को धीमा कर रही हैं।
उद्योग के प्रतिनिधियों का कहना है कि विकास बैंकों के माध्यम से सरलीकृत वित्तपोषण तंत्र, सीमापार परियोजनाओं को नई गति दे सकता है। इसके अलावा, तकनीकी ज्ञान और विशेषज्ञता के आदान-प्रदान के लिए एक औपचारिक व्यवस्था भी आवश्यक मानी जा रही है।
ब्रिक्स देशों में महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना भी प्रस्तावित एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा है। साथ ही, स्मार्ट ग्रिड तकनीक और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के रूप में जैव ईंधन के विकास पर संयुक्त प्रयास की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है।
ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि ये सुधार लागू किए जाएँ तो यह क्षेत्र में निवेश को दोगुना कर सकता है और सभी सदस्य देशों के लिए दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है।