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कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मांग बढ़ने के बाद भी केवल 1% इंजीनियर एफडीई भूमिकाओं में कार्यरत
वैश्विक कंपनियां नौकरी में कटौती के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता को कारण बताती जा रही हैं, लेकिन आईटी उद्योग में विशेषज्ञ इंजीनियरिंग भूमिकाओं की मांग बढ़ रही है।
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नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत सहित विश्वभर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षेत्र में तीव्र विकास के बावजूद इंजीनियरों का एक बहुत छोटा हिस्सा ही फ्रंटेंड इंजीनियरिंग (एफडीई) की विशेषज्ञ भूमिकाओं में काम कर रहा है। वर्तमान आंकड़ों से पता चलता है कि तकनीकी पेशेवरों के बीच केवल 1 प्रतिशत ही इस तरह की विशेषीकृत भूमिकाओं को निभा रहे हैं।
जहां एक ओर वैश्विक स्तर पर बड़ी कंपनियां तकनीकी रूपांतरण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता एकीकरण के नाम पर कर्मचारियों की छंटनी कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर उन्नत इंजीनियरिंग कौशल की कमी स्पष्ट हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विसंगति कौशल विकास और तकनीकी प्रशिक्षण में निवेश की कमी से संबंधित है।
आईटी उद्योग में पेशेवर विकास के लिए यह एक महत्वपूर्ण अंतराल प्रस्तुत करता है। जैसे-जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता अनुप्रयोग अधिक परिष्कृत होते जा रहे हैं, इंजीनियरों की मांग में वृद्धि की संभावना है, विशेष रूप से उन लोगों में जिनके पास विशिष्ट तकनीकी कौशल हों।
इस परिस्थिति में, शिक्षा संस्थान और उद्योग को मिलकर एफडीई जैसी विशेषज्ञ भूमिकाओं के लिए प्रतिभा तैयार करने की आवश्यकता है ताकि भविष्य की मांग को पूरा किया जा सके और तकनीकी बेरोजगारी से बचा जा सके।