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सूखे से जूझ रहा इंग्लैंड, चावल धोने की परंपरा पर प्रतिबंध
पानी की कमी से जूझ रहे इंग्लैंड ने नागरिकों से चावल धोने की परंपरागत प्रथा को सीमित करने का आग्रह किया है। अधिकारी सांस्कृतिक और धार्मिक आदतों में बदलाव लाकर जल संरक्षण की मांग कर रहे हैं।
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सूखे की स्थिति से निपटने के लिए इंग्लैंड के जल प्रबंधन अधिकारियों ने नागरिकों, विशेषकर भारतीय और एशियाई समुदायों को चावल धोने की प्रथा को कम करने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि चावल को सात बार धोने की परंपरागत विधि के बजाय इसे केवल दो बार धोना चाहिए, जिससे काफी मात्रा में जल की बचत हो सकती है।
यह कदम पानी की गंभीर कमी के बीच उठाया गया है, जब क्षेत्र में लंबे समय से सूखा जारी है। प्रशासकीय अधिकारियों ने माना है कि सांस्कृतिक और धार्मिक प्रथाएं समुदायों के लिए महत्वपूर्ण होती हैं, लेकिन जल संकट की गंभीरता को देखते हुए सभी को मिलकर संरक्षण के प्रयासों में भाग लेना होगा।
जल प्राधिकरण ने विभिन्न समुदायों के साथ संवाद स्थापित किया है ताकि उन्हें जल संकट की स्थिति समझाई जा सके और उनसे सहयोग प्राप्त किया जा सके। विशेषज्ञों के अनुसार, घरेलू स्तर पर छोटे-छोटे परिवर्तन समग्र जल उपयोग में महत्वपूर्ण कमी ला सकते हैं।
यह पहल जलवायु परिवर्तन के प्रभावों और बढ़ती जनसंख्या के दबाव के बीच संसाधनों के प्रबंधन के लिए समग्र दृष्टिकोण अपनाने का संकेत देती है। अधिकारी आशा करते हैं कि समुदाय इस महत्वपूर्ण पहल में सक्रिय भागीदारी दिखाएंगे।