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मिश्रित ईंधन नीति से चीनी की कमी, आयात में विदेशी मुद्रा का दबाव
सरकार की इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल योजना को बेहतर परिणामों के लिए तीन-चार साल की तैयारी की आवश्यकता थी। लेकिन जल्दबाजी में लागू होने से चीनी की कमी और बढ़ती कीमतें सामने आई हैं।
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सरकार की इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) योजना को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक सराहनीय पहल है, लेकिन इसे समुचित तैयारी के साथ लागू किया जाना चाहिए था। योजना को व्यावहारिक रूप से क्रियान्वित करने के लिए कम से कम तीन से चार साल की अवधि आवश्यक थी।
हालांकि, जल्दबाजी में योजना को लागू करने से घरेलू चीनी उत्पादन पर दबाव पड़ा है। ईथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने का बड़ी मात्रा में उपयोग किया जा रहा है, जिससे चीनी का घरेलू उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसके परिणामस्वरूप देश को अन्तर्राष्ट्रीय बाजार से चीनी का आयात करना पड़ रहा है।
चीनी के आयात में वृद्धि से देश की विदेशी मुद्रा भंडार पर भार पड़ रहा है। साथ ही, दिवाली और अन्य त्योहारों के मौसम में चीनी की कमी के कारण घरेलू बाजार में कीमतों में वृद्धि हुई है। उपभोक्ताओं को इस अवधि में चीनी सहित अन्य आवश्यक वस्तुओं के लिए अधिक खर्च करना पड़ रहा है।
विश्लेषकों का सुझाव है कि भविष्य में ऐसी नीतियों को क्रियान्वित करने से पहले आवश्यक बुनियादी ढांचे और संसाधनों की पर्याप्त तैयारी सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि अर्थव्यवस्था पर किसी भी प्रकार का नकारात्मक प्रभाव न पड़े।