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कांग्रेस नोटिस के बीच हरीश रावत की स्वतंत्र यात्रा से उठे सवाल
उत्तराखंड में तीन बार मुख्यमंत्री रहे हरीश रावत ने पार्टी आलाकमान की रोक के बावजूद अकेले 'जनसंवाद यात्रा' शुरू की है। इससे उनके और कांग्रेस के बीच गहराते मतभेद की ओर इशारे मिल रहे हैं।
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उत्तराखंड की राजनीति में नया संकट खड़ा हो गया है जब 78 वर्षीय वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने पार्टी के स्पष्ट निर्देशों के विरुद्ध अपनी जनसंवाद यात्रा को जारी रखा। कांग्रेस आलाकमान द्वारा जारी किए गए नोटिस और रोक-टोक के बावजूद रावत का यह कदम संगठन के भीतर गंभीर असंतोष का संकेत दे रहा है।
तीन दशकों से अधिक समय से कांग्रेस में सक्रिय रहे हरीश रावत का यह रुख पार्टी के अनुशासन के लिए एक प्रश्नचिह्न बन गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रावत का यह कदम या तो पार्टी के विरुद्ध खुली बगावत है या फिर संगठन के भीतर अपनी बार्गेनिंग पावर को मजबूत करने की कोशिश हो सकती है।
उत्तराखंड की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में रावत की स्वतंत्र गतिविधियां दलीय एकता के सवालों को जन्म दे रही हैं। कांग्रेस के लिए यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि ऐसी कार्रवाइयां पार्टी की आंतरिक शक्ति को कमजोर कर सकती हैं।
आने वाले समय में यह स्पष्ट हो जाएगा कि रावत का यह कदम पार्टी के साथ उनके संबंधों को किस दिशा में ले जाता है। इस बीच कांग्रेस के लिए अपने वरिष्ठ नेताओं को संगठित रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है।