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गिटपॉड मामले में पूर्व उप-अध्यक्ष को विकलांगता भेदभाव में जीत
शैनन बर्न्स ने गिटपॉड के खिलाफ विकलांगता भेदभाव का मामला जीता है। न्यायाधिकरण ने उनके 76 मिलियन पाउंड के दावे को आगे बढ़ने की अनुमति दी है, हालांकि मुआवजे की राशि अभी तय नहीं हुई है।
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शैनन बर्न्स, जो गिटपॉड में उप-अध्यक्ष के पद पर थीं, को एक महत्वपूर्ण कानूनी जीत मिली है। न्यायाधिकरण ने उनके विकलांगता भेदभाव के दावे को स्वीकार किया है और 76 मिलियन पाउंड की क्षतिपूर्ति के लिए उनके मामले को आगे बढ़ने की अनुमति दी है।
बर्न्स का आरोप है कि गिटपॉड ने उनके विकलांगता को लेकर भेदभाव किया और उन्हें नियोजन से हटाया गया। इस कार्रवाई के कारण उनका तकनीकी क्षेत्र में करियर प्रभावित हुआ है। उन्होंने अपने नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए 76 मिलियन पाउंड का दावा प्रस्तुत किया है।
गिटपॉड ने इस दावे को सीमित करने का प्रयास किया था, लेकिन न्यायाधिकरण ने कंपनी की दलील को स्वीकार नहीं किया। न्यायाधिकरण के निर्णय से बर्न्स के मामले को पूर्ण सुनवाई के लिए आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है।
अब अगला कदम मुआवजे की राशि तय करना है। न्यायाधिकरण को इस बात का मूल्यांकन करना होगा कि क्या बर्न्स द्वारा मांगी गई राशि उनके नुकसान के अनुरूप है। यह मामला कर्मचारी अधिकार और विकलांगता भेदभाव के मुद्दों पर महत्वपूर्ण निर्णय सेट कर सकता है।