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चुनाव आयोग की स्वतंत्रता के लिए संवैधानिक सुरक्षा जरूरी: पूर्व न्यायाधीश

केरल के पूर्व उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के. बालाकृष्णन नायर ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए संविधान में सुरक्षा उपायों की मांग की है। उन्होंने विशेष तीव्र संशोधन के दौरान मतदाताओं को हटाए जाने को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन बताया है।

LSN India · 13 October 2026

चुनाव आयोग की स्वतंत्रता के लिए संवैधानिक सुरक्षा जरूरी: पूर्व न्यायाधीश

न्यायिक जगत से लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण आवाज उठी है। केरल के पूर्व उच्च न्यायालय न्यायाधीश के. बालाकृष्णन नायर ने संवैधानिक स्तर पर चुनाव आयोग की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए विशेष सुरक्षा उपायों की आवश्यकता पर बल दिया है।

न्यायाधीश नायर ने विशेष तीव्र संशोधन प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं को चुनाव सूची से हटाए जाने की कार्रवाई को गंभीर चिंता का विषय बताया है। उनके अनुसार यह कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के मौलिक सिद्धांतों का स्पष्ट उल्लंघन है, जो किसी भी लोकतांत्रिक प्रणाली की नींव होते हैं।

इसी बीच, लेखक के.आर. मीरा ने युवा-नेतृत्व वाले आंदोलनों पर विश्वास व्यक्त करते हुए कहा है कि ये आंदोलन लोकतंत्र और भाईचारे को पुनः स्थापित करने की क्षमता रखते हैं। उनका मानना है कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है।

विशेषज्ञों का मत है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और निष्पक्षता किसी भी राष्ट्र के लिए अपरिहार्य है। इस संदर्भ में पूर्व न्यायाधीश की टिप्पणियां चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही के सवालों को केंद्र में ला रही हैं।