World · India Bureau
FD में सारा पैसा एक साथ लगाना हो सकता है नुकसानदेह
RBI की रेपो रेट में बढ़ोतरी के बाद बैंक जमा पर ब्याज दरें बदल रही हैं। विशेषज्ञ सुझाते हैं कि बेहतर रिटर्न के लिए सीढ़ीदार FD रणनीति अपनानी चाहिए।
LSN India ·
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट में वृद्धि के पश्चात् बैंक जमा पर प्रदान की जाने वाली ब्याज दरों में परिवर्तन देखा जा रहा है। इस परिस्थिति में निवेशकों को FD खोलते समय सावधानी बरतनी चाहिए। यदि कोई निवेशक अपनी संपूर्ण राशि एक ही लंबी अवधि की FD में लगा देता है, तो उसे भविष्य में बेहतर ब्याज दरों का लाभ उठाने का अवसर हाथ से निकल सकता है।
इस स्थिति से बचने के लिए वित्तीय सलाहकार 'लैडरिंग' नामक रणनीति की सिफारिश कर रहे हैं। इस पद्धति में निवेशक अपनी कुल राशि को विभिन्न भागों में विभाजित कर अलग-अलग अवधि की FD खोलते हैं। उदाहरण के लिए, कोई निवेशक अपने पैसे को छह महीने, एक वर्ष, डेढ़ वर्ष और दो वर्ष की FD में बांट सकता है।
इस दृष्टिकोण का मुख्य लाभ यह है कि जब छोटी अवधि की FD परिपक्व होती हैं, तो निवेशक उस राशि को नई, संभवतः अधिक ब्याज दर वाली FD में निवेश कर सकता है। इस प्रकार, यदि आने वाले महीनों में RBI द्वारा और अधिक रेट हाइक की जाती है, तो निवेशक उच्च दरों का लाभ उठा सकता है।
बैंकिंग क्षेत्र में विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा परिस्थिति में FD लैडरिंग सबसे सुरक्षित और तर्कसंगत विकल्प है। यह रणनीति निवेशकों को तरलता बनाए रखने और बदलती ब्याज दरों का अधिकतम लाभ उठाने का मौका देती है।