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आठ साल बाद पहली बार घटा कारखानों में निवेश, वेतन वृद्धि लाभ को पीछे छोड़ी
वित्त वर्ष 2024-25 में कारखानों के स्थिर पूंजी निवेश में 8 प्रतिशत की गिरावट आई है। दो साल की मजबूत वृद्धि के बाद यह पहली बार का संकुचन है, जबकि कारखानों में कर्मचारियों की संख्या बढ़ी है और मजदूरी में वृद्धि मुनाफे की वृद्धि से आगे निकल गई है।
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भारतीय आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में औद्योगिक क्षेत्र में निवेश में उल्लेखनीय संकुचन देखा गया है। सकल स्थिर पूंजी निर्माण में 8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो कोविड-19 महामारी के बाद पहली बार का नकारात्मक रुझान है। पिछले दो वर्षों में कारखानों ने मजबूत निवेश दर दिखाया था, लेकिन इस वित्त वर्ष में यह गति थम गई है।
इसी अवधि में कारखानों ने अपनी कार्यबल में वृद्धि जारी रखी है। औद्योगिक इकाइयों में कर्मचारियों की संख्या में इजाफा हुआ है, जो निर्माण गतिविधियों में कुछ स्थिरता का संकेत देता है। हालांकि, निवेश में यह गिरावट आने वाले महीनों में रोजगार सृजन की क्षमता पर सवाल उठाती है।
वेतन वृद्धि का एक महत्वपूर्ण पहलू यह उभरा है कि कारखानों में मजदूरी में वृद्धि की दर अब कंपनियों के लाभ वृद्धि को पीछे छोड़ चुकी है। इसका अर्थ है कि कंपनियों की मार्जिन दबाव में आ गई है। यह रुझान उत्पादन लागत में वृद्धि और प्रतिस्पर्धात्मक बाजार के संकेत हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि निवेश में यह गिरावट आर्थिक वृद्धि के संदर्भ में चिंता का विषय है। यदि इस प्रवृत्ति में सुधार नहीं हुआ, तो औद्योगिक उत्पादन और नई क्षमता निर्माण प्रभावित हो सकते हैं। सरकार और उद्योग के लिए इस स्थिति को संभालना महत्वपूर्ण हो गया है।