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सोहराबुद्दीन शेख मुठभेड़ मामला: सुप्रीम कोर्ट में 22 आरोपियों की बरी को चुनौती
सोहराबुद्दीन शेख की मौत से जुड़े 2005 के नकली पुलिस मुठभेड़ मामले में बंबई हाई कोर्ट द्वारा 22 आरोपियों को बरी किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिका दाखिल करने वाले नयाबुद्दीन शेख का कहना है कि अदालत ने साक्ष्य की कड़ियों को नजरअंदाज किया है।
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सोहराबुद्दीन शेख के निधन से संबंधित विवादास्पद मुठभेड़ मामले में नया मोड़ आया है। शेख के सहोदर नयाबुद्दीन शेख ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है, जिसमें बंबई हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई है जिसमें 21 पुलिसकर्मियों सहित कुल 22 आरोपियों को बरी कर दिया गया था। यह मामला 2005 में गुजरात के एक अपराधी सोहराबुद्दीन शेख, उनकी पत्नी और सहायक तुलसीराम प्रजापति की मृत्यु से संबंधित है।
बंबई हाई कोर्ट ने 7 मई को अपना फैसला सुनाते हुए कहा था कि अभियोजन पक्ष ने मामले को साबित नहीं किया है। अदालत ने टिप्पणी की थी कि अभियोजन का केस परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित है और परिस्थितियों की श्रृंखला में कई अंतराल हैं। हाई कोर्ट ने दिसंबर 2018 के विशेष सीबीआई अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए याचिका खारिज कर दी थी।
यह फैसला रुबाबुद्दीन और नयाबुद्दीन द्वारा दायर अपीलों पर आया था, जो पहले की अदालती कार्यवाही के नतीजों को चुनौती दे रहे थे। बरी किए गए 22 आरोपियों में 21 पुलिस विभाग के निम्न स्तरीय अधिकारी थे। यह मामला वर्षों से कानूनी विवादों का विषय रहा है और इसमें पुलिस प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।