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परिवार के स्वामित्व वाली कंपनियों का राजस्व FY26 में 72 प्रतिशत तक पहुंचा
भारतीय सूचीबद्ध कंपनियों में परिवार के स्वामित्व वाली फर्मों का हिस्सा पिछले 25 वर्षों में 50 प्रतिशत से बढ़कर 72 प्रतिशत हो गया है। आर्थिक सुधारों के बाद इन कंपनियों की मजबूती से वृद्धि हुई है।
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भारतीय अर्थव्यवस्था के उदारीकरण के बाद परिवार के स्वामित्व वाली कंपनियों के लिए चिंताएं निराधार साबित हुई हैं। इन फर्मों ने न केवल टिके रहे बल्कि आर्थिक सुधारों के दौर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। वर्ष 2001-02 में जहां ये कंपनियां सूचीबद्ध फर्मों के कुल राजस्व का 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व करती थीं, वहीं वर्ष 2025-26 में उनका योगदान 72 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
यह आंकड़ा इस धारणा को चुनौती देता है कि वैश्वीकरण और बाजार उदारीकरण के कारण पारंपरिक परिवार व्यवसायों का पतन होगा। इसके विपरीत, इन संस्थाओं ने न केवल प्रतिस्पर्धी बाजार में अपना स्थान बनाए रखा है बल्कि अपने प्रभाव को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाया है।
ऐसा माना जाता है कि परिवार के नेतृत्व वाली कंपनियों की दीर्घकालीन दृष्टिकोण, पारिवारिक मूल्यों और व्यावहारिक प्रबंधन ने उन्हें आर्थिक चक्रों के उतार-चढ़ाव से बेहतर तरीके से निपटने में सक्षम बनाया है। ये फर्मे विभिन्न क्षेत्रों में विविधीकरण के माध्यम से अपना आधार मजबूत करती रहीं।
इस वृद्धि के पीछे पारिवारिक कंपनियों की विरासत, ब्रांड मूल्य और स्थानीय बाजार की गहरी समझ निहित है। सुधारों के युग में भी ये कंपनियां भारतीय व्यापारिक परिदृश्य का मूल आधार बनी रही हैं।