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कोरियाई युद्ध में शहीद सैनिक को मेडल ऑफ ऑनर देने की मांग
सार्जेंट विली एस्ट्राडा की पारिवारिक मांग है कि उन्हें सर्वोच्च सैन्य सम्मान से नवाजा जाए। 1952 में उत्तरी कोरिया में दुश्मन की गोलीबारी से अपने दल को बचाते हुए 23 साल की उम्र में उनकी मौत हुई थी।
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सार्जेंट विली एस्ट्राडा के परिवार ने लगभग 74 साल बाद उनके साहस और बलिदान को स्वीकृति देने के लिए मेडल ऑफ ऑनर पुरस्कार की मांग शुरू की है। कोरियाई युद्ध के दौरान एस्ट्राडा ने 1952 में उत्तरी कोरिया के बोंगोवोल क्षेत्र में अपने टैंक दल की रक्षा करते हुए जान गंवाई थी। तब वह महज 23 साल के थे।
एस्ट्राडा की वीरता और कुर्बानी को उस समय मरणोपरांत डिस्टिंग्विश्ड सर्विस क्रॉस से सम्मानित किया गया था, जो सेना का दूसरा सर्वोच्च सम्मान है। हालांकि, उनका परिवार मानता है कि उनके असाधारण योगदान को मेडल ऑफ ऑनर के माध्यम से मान्यता मिलनी चाहिए, जो सैन्य सेवा में सर्वोच्च पुरस्कार है।
एस्ट्राडा के परिवार के सदस्य विधायकों के साथ मिलकर उनके वीरतापूर्ण कार्यों को आधिकारिक तौर पर दस्तावेज करने और उनकी विरासत को स्थापित करने के लिए काम कर रहे हैं। परिवार का कहना है कि उनके प्रयासों का उद्देश्य इस बहादुर सैनिक की स्मृति को सम्मानपूर्वक संरक्षित रखना है।