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किसानों और जनप्रतिनिधियों का सरकार से ESA मसौदा अधिसूचना का विरोध करने का आह्वान
कृषि क्षेत्र से जुड़े हितधारकों ने राज्य सरकार को पर्यावरण संरक्षण कानून के प्रस्तावित संशोधन पर आपत्तियां दर्ज करने के लिए कहा है। किसान संगठनों और निर्वाचित प्रतिनिधियों ने सरकार को वैकल्पिक सुझाव भी प्रस्तुत किए हैं।
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किसान संगठनों और विभिन्न क्षेत्रों के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों ने राज्य सरकार से पर्यावरण संरक्षण अधिनियम (ESA) की प्रस्तावित अधिसूचना के विरुद्ध दृढ़ रुख अपनाने का आग्रह किया है। इन हलकों में माना जा रहा है कि वर्तमान मसौदा अधिसूचना कृषि गतिविधियों पर अनावश्यक प्रतिबंध लगाएगी और किसानों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।
हितधारकों का विचार है कि केंद्र स्तर पर तैयार किया गया यह मसौदा स्थानीय कृषि परिस्थितियों और जमीनी वास्तविकताओं को पर्याप्त रूप से ध्यान में नहीं रखता है। किसान समुदाय ने अपनी आजीविका से जुड़े संभावित खतरों के बारे में चिंता व्यक्त की है और अनुरोध किया है कि सरकार केंद्रीय सरकार के समक्ष कृषि हित में संशोधन का प्रस्ताव रखे।
जनप्रतिनिधियों ने सरकार को लिखित सुझाव और संशोधन प्रस्ताव भी सौंपे हैं जिनमें कृषि क्षेत्र की विशेष जरूरतों को संबोधित किया गया है। उन्होंने जोर दिया है कि किसी भी नीतिगत निर्णय से पहले स्थानीय कृषकों, पंचायतों और जिला प्रशासन से विस्तृत परामर्श लिया जाना चाहिए।
राज्य सरकार से अपेक्षा की जा रही है कि वह इन आपत्तियों को गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय अधिकारियों के साथ सरकारी स्तर पर बातचीत करे और कृषि संबंधी हितों की रक्षा के लिए उचित कदम उठाए।