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स्थानीय अरहर उत्पादकों की सुरक्षा के लिए आयात शुल्क लगाने की मांग
राइथा संघ ने भारतीय अरहर किसानों की आजीविका बचाने के लिए सरकार से आयात शुल्क बढ़ाने की अपील की है। संगठन का कहना है कि विदेशी दालों के आयात से घरेलू उत्पादकों को गंभीर नुकसान हो रहा है।
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कृषक संगठन राइथा संघ ने दलहन बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा से निपटने के लिए आयातित अरहर दाल पर आयात शुल्क लगाने की मांग की है। संगठन के अनुसार, विदेशों से सस्ते दरों पर आने वाली अरहर घरेलू किसानों के लिए अस्तित्व का संकट बन गई है।
राइथा संघ का तर्क है कि वैश्विक बाजार में अरहर की कीमतें गिरी हैं, जिससे भारतीय किसान अपने उत्पाद को लाभजनक दरों पर नहीं बेच पा रहे हैं। इस स्थिति में विदेशी आयात से स्थानीय उत्पादकों को सीधी मार पड़ रही है, जिससे कृषि आय में गिरावट आई है।
संगठन ने सरकार से आयात शुल्क को बढ़ाकर घरेलू उत्पादकों को सुरक्षा प्रदान करने का अनुरोध किया है। इससे विदेशी अरहर की कीमत बढ़ेगी और भारतीय किसानों को अपने उत्पाद के लिए बेहतर मूल्य मिल सकेगा।
यह कदम कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और किसानों की आय सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप माना जा रहा है। राइथा संघ का मानना है कि सुरक्षात्मक व्यापार नीति से न केवल किसानों बल्कि पूरे कृषि क्षेत्र को लाभ मिलेगा।