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किसान पहचान जांच के बाद सीमावर्ती जिलों में खाद की बिक्री में भारी गिरावट
सीमावर्ती क्षेत्रों में किसान आईडी सत्यापन शुरू होने के बाद चयनित जिलों में उर्वरक की खपत में तेज गिरावट आई है। इस गिरावट से पहले अवैध खाद तस्करी और सीमा पार की गई सब्सिडी वाली यूरिया की सीमा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
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सीमावर्ती जिलों में किसान पहचान सत्यापन की प्रक्रिया लागू होने के बाद खाद की बिक्री में उल्लेखनीय कमी देखी जा रही है। यह गिरावट इस बात का संकेत है कि पिछले वर्षों में इन क्षेत्रों से काफी मात्रा में उर्वरक का अवैध रूप से स्थानांतरण हो रहा था।
कृषि विभाग के अधिकारियों का मानना है कि किसान पहचान पत्र की अनिवार्य जांच से सब्सिडी वाले यूरिया की तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण संभव हुआ है। इससे पहले इन क्षेत्रों में खाद की खपत के आंकड़ों और वास्तविक उपयोग के बीच व्यापक अंतर देखा जा रहा था।
क्षेत्र के खुदरा व्यापारियों की ओर से कहा जा रहा है कि सत्यापन प्रक्रिया के कारण उनका कारोबार प्रभावित हुआ है, लेकिन सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यह कदम आवश्यक है ताकि सब्सिडी वाली खाद केवल पात्र किसानों तक पहुंचे। विशेषज्ञ इस बात पर बल दे रहे हैं कि इस तरह की जांच प्रणाली को अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों में भी विस्तारित किया जाना चाहिए।
कुल मिलाकर, किसान पहचान सत्यापन प्रणाली ने खाद तस्करी की समस्या को उजागर किया है और सरकार की लक्षित वितरण नीति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।