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लड़ाकू विमानों के उत्पादन में देरी से वायु सेना को नुकसान होगा: प्रमुख
भारतीय वायु सेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह ने कहा है कि लड़ाकू विमानों के उत्पादन में लंबी देरी से सेना को गंभीर नुकसान होगा। उन्होंने जोर दिया कि उत्पादन बढ़ने तक वायु सेना के पास कम से कम 36-40 विमानों का एक स्क्वाड्रन होना चाहिए।
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भारतीय वायु सेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह ने देश की रक्षा क्षमता को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि लड़ाकू विमानों के उत्पादन में आ रही लंबी देरी सेना की संचालन क्षमता को प्रभावित करेगी और इसका नकारात्मक असर पड़ेगा।
वायु सेना के शीर्ष नेतृत्व के अनुसार, मौजूदा समय में भारतीय वायु सेना को विमानों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। सिंह ने कहा कि जब तक स्वदेशी लड़ाकू विमानों का उत्पादन सामान्य गति से नहीं हो जाता, तब तक वायु सेना के पास न्यूनतम 36 से 40 विमानों का एक पूर्ण स्क्वाड्रन होना आवश्यक है।
भारतीय वायु सेना की प्रभावी रक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए वायु सेना के पास पर्याप्त संख्या में अत्याधुनिक लड़ाकू विमान होने चाहिए। प्रमुख ने इस बात पर जोर दिया कि विमानों की आपूर्ति में होने वाली देरी को कम करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए। उत्पादन क्षमता में सुधार से ही सेना की परिचालन क्षमता को मजबूत किया जा सकता है और क्षेत्रीय सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सकता है।