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वायु परिवहन क्षेत्र में एकाधिकार की चेतावनी, वित्त मंत्रालय सतर्क
अडानी और जीएमआर जैसी निजी कंपनियां भारत के आधे से अधिक हवाई यात्रियों को संभाल रही हैं। वित्त मंत्रालय विमानक्षेत्र का निजीकरण करते समय बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के मुद्दे को लेकर चिंतित है।
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भारत के वित्त मंत्रालय ने विमानक्षेत्र के निजीकरण के मामले में विमानन क्षेत्र में बढ़ती एकाधिकारवादी प्रवृत्तियों को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की है। मंत्रालय का मानना है कि देश के प्रमुख निजी संचालकों की बाजार में बढ़ती हिस्सेदारी स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के लिए खतरा बन सकती है।
वर्तमान में अडानी और जीएमआर समूह भारत के कुल हवाई यातायात का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा संभालते हैं। यह केंद्रीकरण बाजार में नई प्रतिस्पर्धा को बाधित कर सकता है और यात्रियों के लिए सेवाएं और दरें प्रभावित कर सकता है।
वित्त मंत्रालय का इस मुद्दे पर ध्यान आगामी विमानक्षेत्र निजीकरण परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण है। नीति निर्माताओं को ऐसी संरचना तैयार करनी होगी जो निजीकरण के लाभ प्रदान करे, लेकिन साथ ही बाजार में एकाधिकार को रोके।
इंडस्ट्री विश्लेषकों का मानना है कि नियामक निकायों को नई परियोजनाओं में प्रवेश के लिए छोटी कंपनियों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है ताकि विमानन क्षेत्र में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित की जा सके।