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रूसी तेल का विकल्प खोजने में भारत को सालाना 3.7 अरब डॉलर का खर्च हो सकता है
अमेरिकी टैरिफ दबाव और बढ़ती ईंधन मांग के बीच भारतीय रिफाइनरियां रूसी कच्चे तेल के विकल्प तलाश रही हैं। इससे भारत को ऊंची कीमतों और आपूर्ति की कमी का सामना करना पड़ सकता है।
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भारतीय तेल रिफाइनरियों के लिए प्रतिदिन 10 लाख बैरल रूसी कच्चे तेल का विकल्प खोजना महंगा साबित हो सकता है। विश्लेषकों के अनुसार, वैकल्पिक स्रोतों से तेल की खरीद के लिए भारत को प्रतिवर्ष अतिरिक्त 3.7 अरब डॉलर तक का खर्च उठाना पड़ सकता है।
अमेरिकी टैरिफ नीति और भू-राजनीतिक तनाव के कारण भारत के रिफाइनर्स वर्तमान में रूसी आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम कर रहे हैं। मध्य पूर्व, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका से आयातित तेल की कीमतें आमतौर पर रूसी क्रूड की तुलना में अधिक होती हैं।
देश में ईंधन की मांग में वृद्धि के इस दौर में तेल की कमी की समस्या और भी गंभीर हो सकती है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और कच्चे तेल की आपूर्ति में किसी भी व्यवधान से उसकी ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
उद्योग विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत को रूसी तेल आयात में विविधता लाते हुए दीर्घकालीन आपूर्ति समझौतों पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही, नवीकरणीय ऊर्जा के विकास में निवेश बढ़ाना भी आवश्यक है ताकि भविष्य में आयातित तेल पर निर्भरता कम की जा सके।