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पूर्वी घाट और मध्य भारत में बढ़ी आग की घटनाएं, पश्चिमी घाट में कमी
वन्यजीव अध्ययन केंद्र के शोध में दो दशकों में 13 संरक्षित क्षेत्रों में लगभग 16,667 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र जलने का खुलासा हुआ है। कई इलाकों में एक से अधिक बार आग लगी है।
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हाल के एक व्यापक अध्ययन में सामने आया है कि भारत के विभिन्न वन क्षेत्रों में आग की घटनाओं का पैटर्न तेजी से बदल रहा है। पूर्वी घाट और मध्य भारत के संरक्षित वन क्षेत्रों में आग की घटनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि पश्चिमी घाट में यह प्रवृत्ति विपरीत दिशा में है।
इस शोध में 20 वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन के अनुसार, इस अवधि में 13 प्रमुख संरक्षित क्षेत्रों में कुल 16,667 वर्ग किलोमीटर भूमि आग से प्रभावित हुई। यह आंकड़ा इस बात को दर्शाता है कि वन संरक्षण में आने वाली चुनौतियां कितनी गंभीर हैं।
चिंताजनक पहलू यह है कि कई क्षेत्र एक बार नहीं, बल्कि कई बार आग का शिकार हुए हैं। इससे संकेत मिलता है कि इन इलाकों में आग से बचाव की रणनीति में बेहतरी की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र-विशेष कारकों जैसे जलवायु परिस्थितियां, वनस्पति का प्रकार और मानवीय गतिविधियां इस भिन्नता के लिए जिम्मेदार हो सकती हैं।
यह अध्ययन देश के वन प्रबंधन नीतियों को बेहतर बनाने और आग से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए क्षेत्र-विशेष रणनीति विकसित करने की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करता है।