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मछली पालन परियोजना से प्राकृतिक जलीय प्रजातियों को खतरा

पर्वतीय क्षेत्रों में मछली संरक्षण के नाम पर की गई पारंपरिक मछली पालन योजनाएं अब स्थानीय जलीय जीवों के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा बन गई हैं। विशेषज्ञ सरकारी नीतियों में तेजी से सुधार की मांग कर रहे हैं।

LSN India · 3 September 2026

मछली पालन परियोजना से प्राकृतिक जलीय प्रजातियों को खतरा

दशकों पहले शुरू की गई मछली पालन परियोजनाओं के लंबे समय तक प्रभाव का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि ये योजनाएं अब पर्वतीय जलाशयों की मूल जलीय प्रजातियों के अस्तित्व को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही हैं। सरकार द्वारा संचालित इन कार्यक्रमों का मूल उद्देश्य स्थानीय मत्स्य पालन को बढ़ावा देना था, लेकिन बाहर से लाई गई मछलियों के कारण पारिस्थितिकी तंत्र में असंतुलन पैदा हुआ है।

पर्यावरण अध्ययन दर्शाते हैं कि आयातित मछली प्रजातियां स्थानीय जीवों का शिकार करती हैं और उनके प्राकृतिक आवास को नष्ट करती हैं। इन परिस्थितियों में कई देशज जलीय प्रजातियां गंभीर रूप से प्रभावित हुई हैं और कुछ क्षेत्रों में लुप्तप्राय श्रेणी में चली गई हैं। पारिस्थितिकीविदों का मानना है कि यह समस्या न केवल आर्थिक दृष्टिकोण से समस्याग्रस्त है, बल्कि जैव विविधता के संरक्षण के लिए भी हानिकारक है।

मछली पालन नीति में सुधार की आवश्यकता पर बल देते हुए विशेषज्ञ स्थानीय प्रजातियों की सुरक्षा के लिए विशिष्ट संरक्षण क्षेत्र स्थापित करने की सिफारिश कर रहे हैं। पर्यावरण संगठनों के अनुसार, आने वाले समय में इन जलाशयों की मूल जलीय संपदा को बचाने के लिए तुरंत कदम उठाने की जरूरत है। सरकारी एजेंसियों से अपेक्षा की जा रही है कि वे आर्थिक हितों और पर्यावरणीय संरक्षण के बीच संतुलन खोजें।