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मछली पकड़ने वाले कर्मचारी भूमि अधिकार और आरक्षण की मांग को लेकर प्रदर्शन की योजना बना रहे हैं
अखिल भारतीय मछली कर्मचारी संघ का नेतृत्व केंद्र सरकार से 'नीली अर्थव्यवस्था नीति' को वापस लेने की मांग कर रहा है। संघ का आरोप है कि यह नीति समुद्र और तटीय क्षेत्रों को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के अधीन कर देती है।
LSN India ·

अखिल भारतीय मछली कर्मचारी संघ का नेतृत्व करने वाले कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार की 'नीली अर्थव्यवस्था नीति' को लेकर गंभीर आपत्तियां जताई हैं। संघ के नेताओं के अनुसार, यह नीति समुद्र और तटीय क्षेत्रों को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के नियंत्रण में सौंप देती है, जिससे स्थानीय मछली पकड़ने वाले कर्मचारियों के हित प्रभावित होते हैं।
संघ के प्रतिनिधियों ने जोर देते हुए कहा है कि सरकार को इस नीति को तुरंत वापस लेना चाहिए। मछली कर्मचारियों की ओर से आने वाले दिनों में भूमि अधिकारों और आरक्षण की मांग को लेकर व्यापक प्रदर्शन किए जाने की संभावना है।
यह मुद्दा भारत में तटीय इलाकों में रहने वाले लाखों मछली पकड़ने वाले परिवारों के जीविका से जुड़ा है। अखिल भारतीय मछली कर्मचारी संघ का मानना है कि पारंपरिक मछली पकड़ने के व्यवसाय को बचाने के लिए स्थानीय कर्मचारियों को भूमि अधिकार और आरक्षण प्रदान करना आवश्यक है।
संघ के इस कदम से तटीय क्षेत्रों में राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है। आने वाले समय में इस विषय पर सरकार और मछली कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के बीच संवाद होने की संभावना व्यक्त की जा रही है।