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FISME ने दबावग्रस्त MSMEs के लिए SME Growth Fund का दायरा बढ़ाने की मांग की
FISME ने 10,000 करोड़ रुपये के SME Growth Fund को उन सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों तक पहुंचाने का आह्वान किया है जिनके खातों में SMA-2 या NPA का दर्जा है किंतु उनके पास व्यावसायिक पुनरुद्धार की ठोस योजना मौजूद है।
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भारतीय सूक्ष्म और लघु उद्यम महासंघ (FISME) ने सरकार से अपील की है कि वह SME Growth Fund की पात्रता शर्तों को संशोधित करे ताकि आर्थिक संकट से जूझ रहे MSMEs को भी इसका लाभ मिल सके। संघ का मानना है कि 10,000 करोड़ रुपये का यह कोष उन उद्यमों तक भी पहुंचना चाहिए जिनके खातों में SMA-2 (Special Mention Account-2) या NPA (Non-Performing Asset) का दर्जा प्राप्त है।
FISME की मुख्य शर्त यह है कि लाभार्थी MSMEs के पास अपने व्यवसाय को पुनः स्थापित करने की विश्वसनीय और क्रियान्वयन योग्य योजना होनी चाहिए। यह दृष्टिकोण उन छोटे कारोबारियों को राहत प्रदान कर सकता है जो महामारी या अन्य संकटों के कारण कर्ज में डूबे हैं किंतु अपने पैरों पर खड़े होने की क्षमता रखते हैं।
वर्तमान में, SME Growth Fund की पात्रता शर्तें अधिकांश दबावग्रस्त MSMEs को बाहर रखती हैं। FISME का तर्क है कि यदि सही समय पर उचित वित्तीय सहायता दी जाए तो ये उद्यम अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार ला सकते हैं और आर्थिक गतिविधि को पुनः जीवंत कर सकते हैं।
घरेलू MSME क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था का रीढ़ माना जाता है। इन उद्यमों को समर्थन देने से न केवल रोजगार सृजन में वृद्धि होगी बल्कि क्षेत्रीय विकास भी सुनिश्चित हो सकेगा। FISME की यह अपील सरकार के समक्ष नीति निर्माण में एक महत्वपूर्ण विचार बिंदु प्रस्तुत करती है।