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पूंजी बाजार लेनदेन के लिए यूपीआई शुल्क निर्धारण में बदलाव की तैयारी
राजस्व साझाकरण मॉडल को नए सिरे से परिभाषित करने के लिए सेबी के प्रतिनिधित्व के साथ पांच रुपये का स्थिर यूपीआई शुल्क प्रस्तावित है। इस प्रस्ताव को भारतीय रिजर्व बैंक और सरकार की मंजूरी की आवश्यकता है।
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पूंजी बाजार के लेनदेन के लिए डिजिटल भुगतान शुल्क संरचना में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। वर्तमान में चर्चा में है कि पूंजी बाजार खंड के लिए यूपीआई लेनदेन पर एक समान पांच रुपये का शुल्क निर्धारित किया जाए। यह प्रस्ताव मौजूदा मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) ढांचे को पुनर्गठित करने का उद्देश्य रखता है।
इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए बाजार नियामक सेबी की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। सेबी के प्रतिनिधित्व के माध्यम से संबंधित हितधारकों के विचार एकत्र किए जाएंगे और उनके सुझाव संरचना को अंतिम रूप देने में मदद करेंगे।
इसके बाद प्रस्ताव को भारतीय रिजर्व बैंक की स्वीकृति लेनी होगी, जो डिजिटल भुगतान प्रणाली का नियामक है। पेमेंट सिस्टम में इस तरह के संशोधन रिजर्व बैंक के दायरे में आते हैं।
अंतिम चरण में सरकार का अनुमोदन आवश्यक है। यह बहु-स्तरीय अनुमोदन प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि सभी प्रभावित पक्षों के हित सुरक्षित रहें और नई व्यवस्था बाजार के लिए स्थिर हो।