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FMCG कंपनियों के मुनाफे पर दबाव, दूसरी छमाही में कीमत बढ़ने की आशंका
कच्चे माल की बढ़ती कीमतों से FMCG क्षेत्र को दोहरी चुनौती का सामना है। कंपनियां दिवाली के बाद कीमत बढ़ाने की योजना बना रही हैं, पर ग्रामीण और आम उपभोक्ता बाजार में माहौल बिगड़ने का खतरा है।
LSN India ·

भारतीय FMCG उद्योग को चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में मुनाफे के दबाव का सामना करना पड़ सकता है। सितंबर तिमाही में कच्चे माल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ गया है। पिछली तिमाही में कुछ राहत मिलने के बाद अब स्थिति फिर से कठिन हो गई है।
खाद्य तेल, चीनी और पैकेजिंग सामग्री की कीमतों में असमान वृद्धि देखी जा रही है। तेल कंपनियों ने सितंबर में पाम ऑयल की कीमतें साल-दर-साल लगभग 21 प्रतिशत बढ़ी बताई हैं, जबकि चीनी की कीमतें साल-दर-साल 18 प्रतिशत अधिक हैं। क्रूड तेल से जुड़े उत्पाद भी महंगे हुए हैं।
FMCG कंपनियों ने त्योहारी सीजन में उपभोक्ता मांग को बचाए रखने के लिए इन बढ़ती लागतों का एक हिस्सा खुद सहा है। हालांकि, दिवाली के बाद कीमतें बढ़ाने की बात की जा रही है, लेकिन मूल्य-संवेदनशील ग्रामीण और आम बाजार में इससे खरीद पर असर पड़ने का जोखिम है।
इंडस्ट्री विश्लेषकों का अनुमान है कि आने वाले महीनों में इनपुट कॉस्ट का दबाव जारी रहेगा। कंपनियों को अपनी मूल्य निर्धारण रणनीति को संतुलित करने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा ताकि मार्जिन को नुकसान न हो और ग्राहकों को भी साथ रखा जा सके।