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त्योहारी सीजन में खाद्य महंगाई से जनता को झटका, फसल जोखिम बढ़े

मानसून की अनिश्चितता, खरीफ फसल के जोखिम और वैश्विक खाद्य कीमतों में उछाल से त्योहारी मौसम में घरेलू बजट पर दबाव बढ़ने के आसार हैं। खाद्य मुद्रास्फीति आने वाले महीनों में ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती है।

LSN India · 8 September 2026

त्योहारी सीजन में खाद्य महंगाई से जनता को झटका, फसल जोखिम बढ़े

देश भर में परिवारों के लिए त्योहारों की खुशियां खाद्य कीमतों में आ रहे इजाफे से धुंधली पड़ सकती हैं। असमान मानसून वर्षा और खरीफ सीजन में फसलों के घटते उत्पादन के साथ ही एल नीनो जैसी जलवायु घटनाओं के संकेत खाद्य महंगाई को नई ऊंचाई देने का खतरा बढ़ा रहे हैं।

वैश्विक बाजार में खाद्य कीमतें पहले से ही ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, जिससे भारतीय घरों की क्रय क्षमता पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। मानसून की अनिश्चितता से खरीफ की फसलें - विशेषकर अनाज और दालें - प्रभावित हो सकती हैं। यह स्थिति अगले कुछ महीनों में बाजार में इन पण्यों की आपूर्ति को सीमित कर सकती है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून पैटर्न सामान्य से विचलित रहे तो खाद्य मुद्रास्फीति त्योहारी सीजन में ऊंचे स्तर पर स्थिर रह सकती है। इसके परिणामस्वरूप दाल, चावल, गेहूं और तेल जैसी आवश्यक चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं।

जलवायु अनिश्चितता के बीच खाद्य सुरक्षा और महंगाई नियंत्रण के लिए नीति निर्माताओं के सामने चुनौती बढ़ गई है। सरकार को खाद्य पदार्थों की आपूर्ति सुनिश्चित करने और कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए समन्वित कदम उठाने पड़ सकते हैं।