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मजबूत विकास के बाद भी विदेशी पूंजी भारत से दूर रही: रिपोर्ट
एस एंड पी-क्रिसिल की नई रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश में 16.6 प्रतिशत की गिरावट आई है। कुल 94.5 अरब डॉलर के सकल विदेशी निवेश के बावजूद, शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश महज 7.8 अरब डॉलर रहा।
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भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि के बाद भी विदेशी निवेशकों का रुख मोड़ने की प्रवृत्ति जारी है। एस एंड पी ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस और क्रिसिल द्वारा संयुक्त रूप से जारी एक विश्लेषणात्मक रिपोर्ट में यह चिंताजनक प्रवृत्ति सामने आई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई है। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष विदेशी पोर्टफोलियो इनफ्लो में 16.6 प्रतिशत की कमी आई है, जो निवेशकों के बीच सावधानी का संकेत देती है।
अधिक चिंताजनक बात यह है कि कुल विदेशी निवेश प्रवाह के आंकड़ों में भी स्पष्ट असंतुलन दिख रहा है। हालांकि कुल सकल निवेश प्रवाह 94.5 अरब डॉलर का रहा, लेकिन शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) महज 7.8 अरब डॉलर तक सीमित रहा। यह अंतर पूंजी के पुनः प्रत्यावर्तन और बाहर की ओर निवेश की प्रवृत्ति को दर्शाता है।
विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव जैसे कारकों ने विदेशी निवेशकों को अधिक सावधान बना दिया है। भारत की मजबूत वृद्धि दर के बावजूद, निवेशकों की आत्मविश्वास में कमी की यह प्रवृत्ति नीति निर्माताओं के लिए गंभीर सवाल खड़े कर रही है।