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विदेशी निवेशकों ने दो महीने की खरीदारी रोककर भारतीय शेयरों से निकाले 7,443 करोड़ रुपये
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार से बड़ी रकम निकालना शुरू किया है। महंगाई और चालू खाता घाटे को लेकर बढ़ती चिंताएं इस बिक्री का मुख्य कारण बताई जा रही हैं।
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विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने दो महीने की क्रय प्रवृत्ति को उलट दिया है और भारतीय इक्विटी बाजार से 7,443 करोड़ रुपये की बिक्री कर दी है। यह कदम वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में आई तीव्र वृद्धि के कारण उठाया गया है, जिसने भारत की मुद्रास्फीति दर और चालू खाता संतुलन को लेकर नई चिंताएं जगाई हैं।
तेल की कीमतों में इस उछाल से भारत जैसे आयातक देशों के आर्थिक संकेतकों पर दबाव बढ़ गया है। विश्लेषकों का मानना है कि ऊंची तेल कीमतें मुद्रास्फीति को बढ़ावा दे सकती हैं और भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर असर डाल सकती हैं। यह स्थिति निवेशकों को अपनी रणनीति पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित कर रही है।
एफपीआई का यह विपरीत रुख भारतीय शेयर बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। निवेशकों का यह कदम आने वाले समय में बाजार की गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है। बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि वैश्विक कारकों और घरेलू आर्थिक स्थितियों के बीच संतुलन भविष्य के निवेश निर्णयों को निर्धारित करेगा।