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वनाधिकार अधिनियम में ग्राम सभा की सहमति का कोई प्रावधान नहीं: जनजातीय मंत्रालय
केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के साथ चर्चा में जनजातीय कार्य मंत्रालय ने कहा है कि वन क्षेत्रों में परियोजनाओं के लिए सौ प्रतिशत ग्राम सभा सहमति से जुड़े मामले उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आते।
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केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारतीय वनाधिकार अधिनियम में परियोजनाओं के लिए ग्राम सभा की सहमति लेने का कोई प्रावधान नहीं है। मंत्रालय का यह बयान विद्युत मंत्रालय के साथ एक विचार-विमर्श के दौरान आया है।
जनजातीय कार्य मंत्रालय ने कहा है कि वन क्षेत्रों में परियोजनाओं को संचालित करने के लिए सौ प्रतिशत ग्राम सभा सहमति की आवश्यकता से संबंधित मामले उसके कार्यक्षेत्र से परे हैं। मंत्रालय का दृष्टिकोण यह है कि इस तरह के विषय किसी अन्य कानूनी ढांचे के तहत आते हैं।
यह स्पष्टीकरण उस समय आया है जब वन क्षेत्रों में विकास परियोजनाओं और स्थानीय समुदायों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाने को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। विद्युत और अन्य अवसंरचना परियोजनाओं को लेकर ग्राम स्तर पर सहमति की प्रक्रिया को लेकर विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की आवश्यकता रही है।
मंत्रालय के इस बयान से साफ है कि वनाधिकार अधिनियम के तहत आने वाली परियोजनाओं में ग्राम सभा की मंजूरी की शर्त वनाधिकार कानून का अंग नहीं है, बल्कि यह किसी अन्य विधायी ढांचे का हिस्सा हो सकता है।