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अम्लीय वर्षा रोकने के लिए खनिज डाले गए, पर पारिस्थितिकी को नुकसान हुआ
1999 में न्यू हैम्पशायर में वनों को ठीक करने के लिए वैज्ञानिकों ने 45 टन वोलास्टोनाइट डाला था। इससे पेड़ों की वृद्धि तो बढ़ी, लेकिन नदियों में नाइट्रोजन का स्तर 30 गुना बढ़ गया।
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न्यू हैम्पशायर के 29 एकड़ के वनक्षेत्र में एक महत्वाकांक्षी पारिस्थितिकी पुनर्स्थापन परियोजना चलाई गई थी। इस परियोजना का उद्देश्य अम्लीय वर्षा के प्रभाव को कम करना था, जो दशकों से इस क्षेत्र की पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचा रही थी।
इस कार्यक्रम के अंतर्गत शोधकर्ताओं ने कैल्शियम युक्त खनिज, विशेषकर वोलास्टोनाइट, की 45 टन की मात्रा वनक्षेत्र में डाली। इस कदम से पेड़ों की जीवनीशक्ति में वृद्धि दिखाई दी और उनकी विकास दर में सुधार आया। हालांकि, यह हस्तक्षेप अप्रत्याशित परिणामों की ओर ले गया।
अध्ययन में पता चला कि इस खनिज प्रयोग के बाद पास की नदियों में अकार्बनिक नाइट्रोजन का स्तर नियंत्रित क्षेत्रों की तुलना में 30 गुना अधिक बढ़ गया। यह वृद्धि पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई। विशेषज्ञों का मानना है कि इस परिणाम से जलीय जीवन को नुकसान पहुंचने का खतरा है।
यह परियोजना पारिस्थितिकी प्रणालियों की जटिल प्रकृति का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। मानवीय हस्तक्षेप के अप्रत्याशित परिणाम पर्यावरण संरक्षण की रणनीति बनाते समय गहन विचार की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि भविष्य की ऐसी परियोजनाओं में पूर्ण पारिस्थितिकी प्रभाव अध्ययन आवश्यक है।