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आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री को चुनाव आयोग कानून पर पश्चाताप
आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने 2023 में पारित चुनाव आयोग संबंधी कानून का समर्थन करने पर खेद व्यक्त किया है। उन्होंने चुनाव आयोग के सदस्यों के चयन के लिए एक तटस्थ निकाय की मांग की है।
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आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने गत वर्ष अपनी सरकार द्वारा समर्थित चुनाव आयोग संबंधी विधेयक को लेकर अपना रुख बदल दिया है। उन्होंने इस कानून का समर्थन करने पर खेद व्यक्त करते हुए कहा है कि यह निर्णय गलत था। पूर्व मुख्यमंत्री के अनुसार, इस कानून के कारण चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता प्रभावित हुई है।
वह अब चुनाव आयोग के सदस्यों के चयन के लिए एक स्वतंत्र और तटस्थ निकाय की स्थापना की मांग कर रहे हैं। उनके अनुसार, यह आवश्यक है कि चुनाव आयोग किसी भी राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त रहे। पूर्व मुख्यमंत्री का मानना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता के लिए चुनाव प्रणाली में निष्पक्षता अत्यावश्यक है।
यह मुद्दा देश भर में चुनाव संस्थाओं की स्वायत्तता को लेकर चल रहे व्यापक बहस का हिस्सा है। विभिन्न राजनीतिक दलें और नागरिक समाज संगठन इस प्रश्न पर अलग-अलग विचार रखते हैं कि चुनाव आयोग के संचालन में पारदर्शिता और निष्पक्षता कैसे सुनिश्चित की जाए।