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चुनाव आयोग का बचाव: 124 सेवानिवृत्त अफसरों का समर्थन
भारत के 124 पूर्व नौकरशाहों ने चुनाव आयोग और मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि जीत पर प्रणाली को ईमानदार माना जाए तो हार पर 'हेराफेरी' नहीं कहा जा सकता।
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देश के सेवानिवृत्त नौकरशाहों ने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता का बचाव करते हुए कहा है कि निर्वाचन आयोग द्वारा संचालित मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया पूरी तरह वैध और आवश्यक है। ये 124 पूर्व नागरिक सेवक इस बात पर जोर देते हैं कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सुसंगतता बनाए रखने के लिए कोई भी चुनाव आयोग को एक ही समय में ईमानदार और पक्षपाती दोनों नहीं मान सकता।
इन अफसरों के अनुसार, मतदाता सूची संशोधन एक अनिवार्य प्रक्रिया है जो मृत मतदाताओं को पहचानने, दोहरी प्रविष्टियों को हटाने और चुनाव रोल की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए नियमित आधार पर की जाती है। यह कदम निर्वाचन व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
वरिष्ठ नौकरशाहों का यह समूह मतदाता सूची के रखरखाव को लेकर चिंताओं को दूर करता है और तर्क देता है कि ऐसी प्रक्रियाएं सभी चुनावों में समान रूप से लागू होती हैं। उनके विचार में, निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को राजनीतिक परिणामों के आधार पर नहीं आंका जा सकता है।