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तमिलनाडु में वन अधिकार दावों की जांच के लिए पूर्व मुख्य न्यायाधीश गवई की नियुक्ति
सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को पूर्व मुख्य न्यायाधीश भूषण आर गवई को तमिलनाडु में वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत जारी किए गए आदेशों की जांच के लिए विशेष समिति का प्रमुख नियुक्त किया। न्यायालय ने राज्य सरकार पर अगस्त्यमलै क्षेत्र में वन निवासियों के दावों की पहचान और निर्णय की वैधानिक प्रक्रिया शुरू न करने के लिए नाराजगी व्यक्त की।
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सर्वोच्च न्यायालय ने वन अधिकार दावों की जांच के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पूर्व मुख्य न्यायाधीश भूषण आर गवई को विशेष समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह समिति तमिलनाडु में वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत राज्य प्राधिकारियों द्वारा जारी किए गए आदेशों की विस्तृत जांच करेगी।
न्यायालय ने अपने फैसले में तमिलनाडु सरकार की आलोचना की है क्योंकि राज्य ने पारिस्थितिकी की दृष्टि से संवेदनशील अगस्त्यमलै क्षेत्र में वन निवासियों के अधिकार दावों की पहचान और निर्णय के लिए वैधानिक प्रक्रिया शुरू करने में लंबे समय तक विफलता दिखाई है। वन अधिकार अधिनियम, 2006 वन समुदायों और व्यक्तিगत वन निवासियों को उनकी भूमि और संसाधनों पर अधिकार स्थापित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी ढांचा है।
गवई के नेतृत्व में बनी समिति का कार्य तमिलनाडु में वन अधिकार दावों के प्रसंस्करण में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना होगा। यह कदम अगस्त्यमलै जैसे संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्रों में वन निवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायालय की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।