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IIT में प्रतिस्पर्धा की संस्कृति का अंधेरा पक्ष, पूर्व छात्र का खुलासा

IIT मद्रास के एक पूर्व छात्र ने 1980 के दशक में कैंपस में व्याप्त गहरी सामाजिक विभाजन की बात उजागर की है। रैंक से लेकर शाखा चयन तक की होड़ में छात्रों के बीच भेदभाव की परतें देखने को मिलीं।

LSN India · 24 September 2026

IIT में प्रतिस्पर्धा की संस्कृति का अंधेरा पक्ष, पूर्व छात्र का खुलासा

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में व्याप्त प्रतिस्पर्धी माहौल की वास्तविकता को एक पूर्व छात्र ने सामने लाया है। IIT मद्रास से जुड़े इस शिक्षार्थी के अनुभवों से पता चलता है कि किस प्रकार कैंपस की सामाजिक गतिविधियों में हर वर्ष सूक्ष्म भेदभाव की नई परतें सामने आती थीं।

छात्रों के बीच होड़ रैंकिंग से शुरू होकर शाखा के चयन, अकादमिक प्रदर्शन और अंतर्राष्ट्रीय नौकरी के अवसरों तक जारी रहती थी। इस प्रक्रिया में कुछ छात्र समूहों को दूसरों से अधिक महत्व दिया जाता था, जिससे कैंपस में एक अलिखित पदानुक्रम बना हुआ था।

पूर्व छात्र के विवरण में एक घटना का उल्लेख है जब विषय-संबंधी कठिनाई के संदर्भ में शिक्षकों द्वारा छात्रों की शाखा के आधार पर भेद करने का व्यवहार देखा गया। इस तरह की टिप्पणियां संस्था के भीतर एक पक्षपातपूर्ण मानसिकता को प्रतिबिंबित करती हैं।

यह खुलासा IIT जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं में प्रचलित अंतर्निहित भेदभाव की संरचना पर सवाल उठाता है। ऐसे मामले उच्च शिक्षा में समतामूलक वातावरण सुनिश्चित करने की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।