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पूर्व विधान परिषद सदस्य ने जमीन की प्रतिबंधित सूची को चुनौती दी
एक पूर्व विधान परिषद सदस्य ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है, जिसमें सरकार द्वारा जारी जमीन की प्रतिबंधित सूची को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि यह सूची BRS नेताओं को निशाना बनाने के लिए तैयार की गई है।
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एक पूर्व विधान परिषद सदस्य ने उच्च न्यायालय का रुख किया है और सरकार द्वारा प्रकाशित संपत्ति की प्रतिबंधित सूची की वैधता पर सवाल उठाया है। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में दावा किया है कि यह सूची विशेष रूप से भारतीय राष्ट्रवादी समाज (BRS) के नेताओं के विरुद्ध निर्देशित की गई है।
याचिकाकर्ता के अनुसार, यह प्रतिबंधित सूची पक्षपातपूर्ण तरीके से तैयार की गई है और यह विरोधी दलों के सदस्यों को लक्षित करती है। उन्होंने तर्क दिया है कि इस कार्रवाई से संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन होता है और यह समान संरक्षण के सिद्धांत के विरुद्ध है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि सरकार द्वारा अपनाई गई यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और न ही इसमें उचित सुनवाई की व्यवस्था की गई है। याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायालय से इस सूची को रद्द करने और सरकार को पुनः निर्देश जारी करने के लिए कहा है।
यह मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि यह सरकार की नीतियों की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाता है। उच्च न्यायालय से अब इस याचिका पर सुनवाई करने की प्रतीक्षा की जा रही है।