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जनगणना डेटा की गोपनीयता जरूरी: पूर्व अधिकारियों की चेतावनी
भारत के पूर्व सरकारी अधिकारियों ने जनगणना के आंकड़ों की गोपनीयता बनाए रखने पर जोर दिया है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर से जुड़े संभावित खतरों से जोड़ा है।
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देश के पूर्व प्रशासकों ने जनगणना डेटा की गोपनीयता को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है और इसे संरक्षित रखने की मांग की है। विशेषज्ञों के अनुसार, 1951 में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर तैयार करते समय जनगणना के विवरणों की प्रतिलिपि बनाई गई थी। यह ऐतिहासिक उदाहरण वर्तमान में जनगणना सूचना के दुरुपयोग की संभावना को दर्शाता है।
ऐतिहासिक रिकॉर्ड से पता चलता है कि देशव्यापी राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर कभी सार्वजनिक नहीं किया गया था। इसका एकमात्र अपवाद तत्कालीन अविभाजित असम था, जिसमें मणिपुर और त्रिपुरा भी शामिल थे। यह तथ्य दर्शाता है कि जनगणना डेटा का इस्तेमाल नागरिकता सूचियां बनाने के लिए किया जा सकता है।
पूर्व सरकारी कर्मचारियों की चेतावनी के मद्देनजर, नीति निर्माताओं को जनगणना की व्यक्तिगत सूचनाओं की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। वर्तमान समय में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर और संभावित नागरिक रजिस्टर से संबंधित चिंताएं बढ़ गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जनगणना के आंकड़ों की गोपनीयता नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।