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न्यायाधीश कौल की किताब में कॉलेजियम सुधार पर जोर, कार्यपालिका के प्रभाव की चिंता

सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश संजय किशन कौल ने अपने संस्मरण 'विदाउट फियर ऑर फेवर' में न्यायिक नियुक्तियों की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कॉलेजियम प्रणाली में सुधार की जरूरत बताई है।

LSN India · 1 November 2026

न्यायाधीश कौल की किताब में कॉलेजियम सुधार पर जोर, कार्यपालिका के प्रभाव की चिंता

न्यायाधीश संजय किशन कौल ने अपने हाल ही में प्रकाशित संस्मरण में न्यायपालिका की नियुक्ति प्रक्रिया पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कॉलेजियम की सिफारिशों को मंजूरी देने में लगातार देरी की समस्या की ओर ध्यान आकर्षित किया है, जिससे न्यायिक पद खाली रहते हैं।

कौल के अनुसार, कार्यपालिका का कॉलेजियम प्रणाली पर बढ़ता हुआ प्रभाव न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए चिंताजनक है। उन्होंने इस प्रणाली में पारदर्शिता और समयबद्धता लाने की आवश्यकता पर बल दिया है। सेवानिवृत्त न्यायाधीश का मानना है कि न्यायिक नियुक्तियों में देरी से न केवल कानूनी प्रक्रियाएं प्रभावित होती हैं, बल्कि न्याय तक आम जनता की पहुंच भी बाधित होती है।

कौल की किताब उन मुद्दों पर प्रकाश डालती है जो भारतीय न्यायपालिका के समक्ष विद्यमान हैं। उनके विचारों को विधिक समुदाय में सुधारों के लिए एक महत्वपूर्ण आवाज माना जा रहा है। किताब न्यायिक स्वतंत्रता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

न्यायिक नियुक्तियों का मुद्दा भारतीय लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है। कौल की राय से न्यायपालिका सुधार के विमर्श में नई गति मिलने की संभावना है। संविधान की मजबूती के लिए शक्तियों के पृथक्करण का सिद्धांत कितना महत्वपूर्ण है, यह उनके विचार पुनः रेखांकित करते हैं।