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फोर्टिस ने उच्च न्यायालय के फोरेंसिक ऑडिट आदेश के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में दायर की याचिका
स्वास्थ्य सेवा कंपनी फोर्टिस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें उच्च न्यायालय के फोरेंसिक ऑडिट आदेश को चुनौती दी गई है। कंपनी का आरोप है कि दैइची संक्यो प्रवर्तन कार्यवाही के दौरान संपत्ति क्षरण संबंधी आदेश गलत है।
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फोर्टिस हेल्थकेयर लिमिटेड ने उच्च न्यायालय द्वारा पारित फोरेंसिक ऑडिट के आदेश को निरस्त करने के लिए भारत के सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की है। यह कदम दैइची संक्यो से संबंधित एक विवाद के मध्य उठाया गया है, जहां कंपनी के खिलाफ संपत्ति के कथित अनुचित हस्तांतरण की जांच की जा रही है।
फोर्टिस का तर्क है कि उच्च न्यायालय द्वारा आदेशित फोरेंसिक ऑडिट अनावश्यक है और कंपनी के व्यावसायिक संचालन में बाधा डालेगा। कंपनी का यह भी कहना है कि जांच के दौरान पहले से ही पर्याप्त पारदर्शिता बरती जा रही है और अतिरिक्त ऑडिट की कोई वैधानिक आवश्यकता नहीं है।
दैइची संक्यो ने अपने निवेश के संबंध में फोर्टिस पर कई आरोप लगाए हैं, जिसमें कंपनी की संपत्ति और संसाधनों के दुरुपयोग की शिकायत शामिल है। उच्च न्यायालय ने इन आरोपों की जांच के लिए फोरेंसिक ऑडिट का आदेश देते हुए सभी पक्षों के हितों की रक्षा करने का निर्णय लिया था।
सर्वोच्च न्यायालय में यह याचिका कॉर्पोरेट प्रशासन और निवेशक सुरक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण कानूनी सवालों को उठाती है। मामले का फैसला अन्य कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण स्थापित कर सकता है।