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मुंबई में 80 प्रतिशत लोग यूपीआई पर एमडीआर शुल्क देने को तैयार नहीं
एक सर्वेक्षण में पता चला है कि मुंबई के अधिकांश निवासी अक्टूबर 2025 से 2,000 रुपये से अधिक की यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर शुल्क के बजाय क्रेडिट कार्ड या नकद का इस्तेमाल करने की ओर रुख करेंगे।
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मुंबई में डिजिटल भुगतान की आदतों पर किए गए एक अध्ययन में चिंताजनक संकेत मिले हैं। सर्वेक्षण के अनुसार, महानगर के चार में से पांच निवासी 2,000 रुपये से अधिक की यूपीआई लेनदेन पर लागू होने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क का भुगतान करने के लिए तैयार नहीं हैं। यह शुल्क आने वाले महीने में प्रभावी होने वाला है।
अध्ययन से पता चलता है कि एमडीआर नीति के लागू होने के बाद अधिकांश मुंबईकर अपनी भुगतान पद्धति बदलने का विचार कर रहे हैं। प्रभावित उपभोक्ताओं के बीच क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और नकद लेनदेन की ओर लौटने की प्रवृत्ति देखी जा रही है। यह प्रवृत्ति डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लक्ष्य के साथ विरोधाभास प्रस्तुत करती है।
नीति के कार्यान्वयन से पहले इस सर्वेक्षण के परिणाम नीति निर्माताओं और भुगतान प्लेटफॉर्मों के लिए महत्वपूर्ण संकेत हैं। व्यापारियों के लिए अतिरिक्त लागत का मतलब हो सकता है कि वे भी ग्राहकों से सीधे शुल्क वसूल करने या नकद लेनदेन को प्रोत्साहित करने का प्रयास करें।
अर्थव्यवस्था की दिशा में यह विकास कैशलेस भुगतान को प्रोत्साहित करने के सरकार के प्रयासों पर प्रश्नचिह्न लगाता है। शहर के एक बड़े हिस्से में यूपीआई का उपयोग काफी बढ़ा है, किंतु अतिरिक्त शुल्क इस सकारात्मक रुझान को उलट सकता है।