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बंगाल चुनाव पंजीकरण प्राधिकरण से चौथे न्यायाधीश का इस्तीफा
कलकत्ता उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश बिस्वजित बसु ने चुनावी सूची से लाखों नाम हटाए जाने के विवादास्पद मामले की जांच से जुड़े विशेष न्यायाधिकरण से इस्तीफा दे दिया है। यह चौथा ऐसा मामला है जब इस पद पर नियुक्त एक पूर्व न्यायाधीश ने अपने पद से हटने का फैसला किया है।
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बिस्वजित बसु का इस्तीफा बंगाल के राज्य चुनाव पंजीकरण (एसआईआर) प्राधिकरण की कार्यप्रणाली को लेकर गहरी चिंताओं को उजागर करता है। एसआईआर न्यायाधिकरण गठन एक महत्वपूर्ण विवाद के बीच हुआ था जब राज्य के मतदाता सूचीकरण से करीब दस लाख से अधिक नाम विलोपित किए गए थे।
न्यायाधिकरण का प्रमुख उद्देश्य चुनावी मतदाताओं की सूची से होने वाले इस विशाल विलोपन की जांच करना था। हालांकि, इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के दौरान अब तक कई वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों ने इस पद को छोड़ना पसंद किया है।
बसु की खीझ न केवल एक व्यक्तिगत निर्णय है, बल्कि यह न्यायाधिकरण के संरचनात्मक और प्रशासनिक मुद्दों की ओर इशारा करती है। निरंतर न्यायाधीशों के पद त्यागने की घटनाएं इस प्राधिकरण की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगाती हैं।
ऐसी परिस्थितियों में, पश्चिम बंगाल सरकार के लिए न्यायाधिकरण की कार्यप्रणाली को सुधारना और इसके संचालन में पारदर्शिता लाना एक आवश्यक कदम बन गया है ताकि लाखों मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।