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यूपीआई को मुफ्त रखना चाहिए या नहीं? जानें पूर्व विशेषज्ञ की राय
राष्ट्रीय भुगतान निगम के पूर्व प्रमुख संतनु पॉल का मानना है कि यूपीआई की सफलता का सीधा संबंध इसके मुक्त उपयोग मॉडल से है। वह मानते हैं कि यह व्यवस्था भारत के डिजिटल भुगतान क्रांति की नींव बनी है।
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भारत के डिजिटल भुगतान प्ल्टफॉर्म यूपीआई के भविष्य को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस छिड़ी है। राष्ट्रीय भुगतान निगम के पूर्व प्रमुख संतनु पॉल का कहना है कि यूपीआई को उपभोक्ताओं के लिए मुफ्त रखना उसकी अभूतपूर्व सफलता की मूल कुंजी है। वह मानते हैं कि यह मुक्त मॉडल ही वह कारण है जो यूपीआई को भारत के लाखों-करोड़ों उपयोगकर्ताओं तक पहुंचाने में सफल रहा है।
पॉल के अनुसार, यूपीआई की व्यापक स्वीकृति और उपयोग का कारण यह है कि इसमें न तो उपभोक्ताओं को कोई शुल्क देना पड़ता है और न ही किसी प्रकार की जटिलताएं हैं। यह सरलता और सुलभता ही इस प्रणाली को देश की आर्थिक व्यवस्था का अभिन्न अंग बना गई है। उनका मत है कि यूपीआई के मुक्त मॉडल को किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे देश के वित्तीय समावेशन में बाधा आ सकती है।
भारत के डिजिटल भुगतान क्षेत्र में यूपीआई की भूमिका अतुलनीय रही है। इसके माध्यम से भारत ने न केवल नकद लेनदेन को कम किया है, बल्कि आर्थिक व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाया है। पॉल का यह विचार भी महत्वपूर्ण है कि मुक्त प्रणाली ही यूपीआई को एक जन-आंदोलन बना सकी है जिसमें छोटे दुकानदार से लेकर बड़े व्यापारी सभी सहभागी हैं।