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विलुप्त प्रजाति को बचाने वाले वैज्ञानिक: मॉरीशस बाज़ की संख्या 4 से 600 तक
1974 में जब मॉरीशस के मूल निवासी बाज़ की प्रजाति के मात्र चार पक्षी बचे थे, तब वैज्ञानिक कार्ल जोन्स ने इसे विलुप्ति से बचाने का ऐतिहासिक अभियान शुरू किया। आज इसी प्रजाति की आबादी 600 तक पहुंच गई है।
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मॉरीशस की मूल निवासी बाज़ प्रजाति (केस्ट्रेल) को विलुप्ति के कगार से वापस लाना एक दुर्लभ सफलता की कहानी है। 1974 में जब यह प्रजाति केवल चार पक्षियों तक सीमित रह गई थी, तब वैज्ञानिक कार्ल जोन्स ने इसके संरक्षण के लिए एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम शुरू किया।
जोन्स के नेतृत्व में चलाए गए इस संरक्षण प्रयास में प्रजनन कार्यक्रम, आवास संरक्षण और जनसंख्या प्रबंधन के उपाय शामिल थे। दशकों की निरंतर मेहनत और वैज्ञानिक दक्षता के माध्यम से इस लुप्तप्राय प्रजाति की संख्या में क्रमिक वृद्धि हुई।
वर्तमान में मॉरीशस केस्ट्रेल की आबादी 600 तक पहुंच गई है, जो संरक्षण प्रयासों की सफलता का प्रमाण है। यह उदाहरण दर्शाता है कि कैसे सुनियोजित और दीर्घकालीन प्रयासों से विलुप्ति के कगार पर पहुंची प्रजातियों को पुनः जीवंत किया जा सकता है।
इस सफलता को जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक मील का पत्थर माना जाता है और यह विश्वभर में संरक्षणवादियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ बिंदु बन गई है।