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एशियाई खेलों में मैराज का सफर: क्रिकेट बल्ले से शूटिंग तक
उत्तर प्रदेश के खुर्जा से आने वाले 50 वर्षीय मैराज अहमद खान का खेल जगत में सफर क्रिकेट से शुरू हुआ था, लेकिन आज वे शूटिंग में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए एशियाई खेलों में अपनी चौथी प्रतिभागिता के लिए तैयार हैं।
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बुलंदशहर जिले के खुर्जा से आने वाले मैराज अहमद खान का खेल जगत में सफर अविश्वसनीय प्रेरणा का स्रोत है। वर्तमान में 50 वर्षीय मैराज इस बार आइची-नागोया एशियाई खेलों में भारतीय दल का हिस्सा बनेंगे। उन्हें घुड़दौड़ खिलाड़ी श्रुति वोरा के बाद भारतीय प्रतिनिधिमंडल में दूसरा सबसे वरिष्ठ सदस्य का स्थान मिला है।
मैराज के लिए शूटिंग कभी उनका गंतव्य नहीं थी। 1994 में जब उन्होंने खेल जगत में कदम रखा था, तो क्रिकेट ही उनका पहला प्रेम था। बाएं हाथ से खेलने वाले इस शीर्ष क्रम के बल्लेबाज ने आमतौर पर नंबर 3 पर खेलते हुए उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने सीके नायडू और विनू मांकड ट्रॉफी जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में खेला।
1996 में जामिया मिल्लिया इस्लामिया में दाखिला लेने के बाद मैराज ने विश्वविद्यालय स्तर की क्रिकेट खेली। उन्होंने अंतर्विश्वविद्यालयीय प्रतियोगिताओं और विजी ट्रॉफी में भी भाग लिया। लेकिन समय के साथ उनका रुझान शूटिंग की ओर हुआ और वे इस खेल में पारंगत हो गए।
खुर्जा से दुनिया भर की शूटिंग रेंज तक का मैराज का सफर उन्हें वहां तक ले गया, जहां वे कभी पहुंचने की कल्पना भी नहीं कर सकते थे। यह उनकी चौथी एशियाई खेलों में प्रतिभागिता होगी, जो उनकी निरंतर प्रतिबद्धता और खेल प्रेम का प्रमाण है।