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येल की फीस भरने के लिए रात भर रिसेप्शन का काम करती रहीं इंद्रा नूयी
पेप्सिको की पूर्व मुख्य कार्यकारी इंद्रा नूयी ने अपनी शिक्षा के दिनों की कठोर परिश्रम की कहानी साझा की है। 1970 के दशक के अंत में येल विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान वह आधी रात से सुबह पाँच बजे तक डॉर्मिटरी रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं।
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जब भारत से आई इंद्रा नूयी 1970 के दशक के अंत में येल विश्वविद्यालय में स्नातक स्तर की प्रबंधन शिक्षा के लिए संयुक्त राष्ट्र अमेरिका पहुँचीं, तो वह खुद को एक विदेशी के रूप में अकेली महसूस करती थीं। भारतीय परिवार से आए होने के कारण, विदेशी परिवेश में वह सामंजस्य बिठाने के लिए संघर्ष कर रहीं थीं।
अपनी महँगी शिक्षा का वहन करने के लिए नूयी को एक अनोखे रास्ते पर चलना पड़ा। विश्वविद्यालय के अंदर नौकरी का अवसर पाते ही उन्होंने डॉर्मिटरी के रिसेप्शन में काम करने का निर्णय लिया। प्रति दिन आधी रात से सुबह पाँच बजे तक की पाली में काम करते हुए, वह अपनी पढ़ाई के खर्चों को पूरा करती थीं।
कक्षाओं में शामिल होने से पहले पूरी रात की कड़ी मेहनत के बाद, नूयी ने अपनी स्नातक डिग्री पूरी की। उनकी यह कहानी परिश्रम, दृढ़ संकल्प और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। बाद में, नूयी ने पेप्सिको जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनी में शीर्ष पद तक पहुँचने के लिए अपना मार्ग प्रशस्त किया।
नूयी की यह यात्रा उन लोगों के लिए प्रेरणादायक है जो अपनी शिक्षा और करियर के सपनों को पूरा करने के लिए कठिन परिश्रम कर रहे हैं। उनका जीवन यह साबित करता है कि आर्थिक कठिनाइयाँ और सांस्कृतिक अंतर भी दृढ़ निश्चय के सामने बाधा नहीं बन सकते।